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जमशेदपुर को नाला आधारित जलनिकासी पर ध्यान देना ही होगाःसरयू राय


24 June 2025 | जमशेदपुर

बोले सरयू
-स्विस गेटों के मेंटिनेंस में कठिनाई आती है
-छोटी नालियों को दुरुस्त करना जरूरी
-पारडीह से लेकर बालीगुमा तक एक बड़े नाले की जरूरत
-2017-18 के डीपीआर का क्या हुआ, किसी को पता नहीं

जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय ने दो टूक कहा है कि अब जमशेदपुर को नाला आधारित जलनिकासी योजना पर ध्यान देना ही होगा। 
यहां मिलानी हॉल में बीते दिनों हुई बारिश के कारण परेशानियों के संबंध में लोगों से कारण और निदान पूछने के लिए आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि अपने पूर्व के कार्यकाल में उन्होंने मानगो में चार स्विस गेट बनवाया था। यह सही है कि इन स्विस गेटों के मेंटिनेंस में कठिनाई आती है। उस वक्त भी उन्होंने कहा था कि हर स्विस गेट के पास एक पंप सेट होना चाहिए ताकि नाला के पानी को बरसात के समय में नदी में पंपसेट की मदद से गिराया जा सके। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। 

श्री राय ने कहा कि जिन मोहल्लों की छोटी-बड़ी नालियां नाले तक पहुंचती हैं, उन्हें दुरुस्त करना जरूरी है। उस दौर में भी यह बात कही गई थी कि लेकिन यह काम हुआ नहीं। इस काम को हम लोगों को ही कराना होगा। लोगों के दिमाग में यह बात आनी चाहिए कि उन्हें ऐसा कोई काम नहीं करना है, जिससे मोहल्ले में पानी जमा हो। 
मानगो नगर निगम पर हमलावर होते हुए सरयू राय ने कहा कि इस नगर निगम के पास इतनी शक्ति ही नहीं कि कोई काम करा सके। उन्होंने कहा कि नगर निगम मानगो से फाइल को रांची भेजने में ही 15 दिन लगा देता है। इससे क्या उम्मीद करें। उन्होंने सुझाव दिया कि नगर निगम 50 साल का आंकड़ा निकाले और यह जांचे कि इन 50 वर्षों में औसतन कितनी बारिश बरसात के दिनों में होती है। एक औसत के आधार पर जो आंकड़ा आए, उस आधार पर नगर निगम को अपनी तैयारी करनी चाहिए ताकि जल जमाव की समस्या से मुक्ति मिले। 

श्री राय ने कहा कि 2008 में एक बार और 2017-18 में दूसरी बार कंसल्टेंट बहाल हुए। इन कंसल्टेंटों ने पूरे मानगो के पानी को किस तरीके से नदी तक लाया जाए, इसकी रुपरेखा तैयार की थी। उसका डीपीआर भी तैयार हो गया था। लेकिन बीते 7 साल से वह योजना जहां थी, आज भी वहीं है। कोई बताने को तैयार नहीं कि उस योजना का क्या हुआ। वह योजना आगे बढ़ी ही नहीं। एक टीम बना कर आप लोगों को यह पता करना चाहिए कि 2017-18 में जो डीपीआर बना था, वह कहां अटक गया। क्या प्रगति हुई। यह जनहित का काम है और इसके लिए प्रशासन पर दबाव बनाना जरूरी है। 

श्री राय ने कहा कि टाटा शहर का नाम टाटा स्टील के कारण देश-विदेश में मशहूर है। लेकिन, टाटा स्टील के लीज इलाके में भी अब चौक-चौराहों पर बरसात के दिनों में पानी जमा हुआ दिख जाता है। जो नॉन लीज इलाके हैं, उनकी तो बात ही मत करें। वहां तो जो हुआ है, वह हम सभी ने अभी देखा ही है। गोलमुरी, सिदगोड़ा में पानी लगता है। 100 साल पुराना शहर है। पहले नाले बेतरतीब बहते थे क्योंकि बस्तियां नहीं थीं। अब जबकि बस्तियां बस गई हैं, फिर भी नाले बेतरतीब ही बह रहे हैं और लोग परेशान हो रहे हैं। नाले जैसे पहले थे, आज भी वैसे ही हैं। टाटा स्टील को भी इस पर विचार करना होगा। जलजमाव को रोकने के लिए कंपनी क्या योगदान कर सकती है, इस पर बात करने की जरूरत है। छोटे नालों की दिक्कत यह है कि उनकी वहन क्षमता कम है जिस कारण वह पानी को फ्लैट अथवा सड़क की तरफ फेंक देता है। इस कारण ही परेशानी होती है। उन्होंने पारडीह से लेकर बालीगुमा तक एक बड़े नाले की जरूरत पर जोर दिया। 

2018 के डीपीआर के आधार पर काम होता तो आज यह नौबत नहीं आतीःआशुतोष राय
जमशेदपुर। स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट के ट्रस्टी और वरिष्ठ जदयू नेता आशुतोष राय ने कहा कि जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय इकलौते ऐसे विधायक हैं जो बारिश के पानी में तीनों दिन भीग-भीग कर लोगों से संवाद करते रहे, उनकी समस्याओं को दूर करने का प्रयास करते रहे और पानी उतर जाने के बाद इलाके के लोगों को बुलाकर खुद ही उनसे सवाल पूछ रहे हैं और उनसे ही निदान के लिए सुझाव मांग रहे हैं। 

मीडिया से बातचीत में आशुतोष राय ने कहा कि बारिश के दौरान प्रशासनिक लापरवाही साफ तौर पर दिखी। नगर निगम भी उतना एक्टिव नहीं था, जितना उसे होना चाहिए था। 2017-2018 में जल-मल निकासी योजना का डीपीआर बना था। उसमें यह व्यवस्था थी कि छोटी नालियों का पानी बड़े नालों में गिरेगा और नालों का पानी एसटीपी के माध्यम से शुद्ध होकर नदी में गिरेगा। लेकिन, सात साल बीत जाने के बाद भी उस डीपीआप की सुध लेने वाला कोई नहीं है। अगर उस डीपीआर के आधार पर काम होता तो आज यह नौबत नहीं आती |

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