बाबुडीह के पास स्वर्णरेखा नदी में मछलियों के मरने तथा उसके बाद धातकीडीह तालाब में बड़ी संख्या में मछलियों की मरने की घटना की उच्चस्तरीय जाँच कराये जाने को लेकर सरयू राय का प्रेस वक्तव्य
10 April 2026 | जमशेदपुर
सरयू राय ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त से मांग किया है कि बाबुडीह के पास स्वर्णरेखा नदी में मछलियों के मरने तथा उसके बाद धातकीडीह तालाब में बड़ी संख्या में मछलियों की मरने की घटना की उच्चस्तरीय जाँच कराये। कारण कि इन दोनों घटनाओं मेें झारखण्ड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जाँच का निष्कर्ष बहुत ही सतही है, जो विश्वसनीय प्रतीत नहीं हो रही है।
यह जानना आवश्यक है कि जमशेदपुर के वायुमंडल में ऐसे कौन से दूषित तत्व प्रवेश कर रहे हैं, जिससे नदी और तालाब का पानी प्रदूषित हो रहा है और मछलियाँ मर रही है। झारखण्ड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार नदी और तालाब में आॅक्सीजन की कमी से यह स्थिति उत्पन्न हुआ है। तालाब में मछलियों के मरने के बारे में इनका निष्कर्ष है कि तापक्रम के बढ़ने और घटने के कारण ऐसा हुआ है और नदी के बारे में इनका कहना है कि बारिश के कारण शहर की गन्दगी बड़े पैमाने पर नदी में जाने से आॅक्सीजन कम हुआ है और मछलियाँ मरी है। ये दोनों ही निष्कर्ष सतही है।
झारखण्ड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बताना चाहिए कि जमशेदपुर में टाटा स्टील की फैक्टरी से जो बहिस्राव नाला के माध्यम से नदी में आ रहा है, उसमें प्रदूषक तत्व की मात्रा स्वीकृत सीमा से कितनी अधिक है, यह आँकड़ा सार्वजनिक किया जाना चाहिए। कायदे से आँकड़े झारखण्ड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वेबसाईट पर होना चाहिए, परन्तु इनका वेबसाईट देखने पर ये आँकड़े नहीं मिल रहे है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाईट पर कतिपय मानकों के आँकड़े उपलब्ध है, जो बताते हैं कि कारखाने से हो रहे बहिस्राव में बीओडी और सीओडी की मात्रा निर्धारित मात्रा से काफी अधिक है। झारखण्ड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह भी बतलाना चाहिए कि कारखाना से निकलनेवाले दूषित बहिस्राव में साईनाईड की मात्रा कितना है। राज्य और केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड साईनाईड की माॅनिटरिंग कर रही है अथवा नहीं कर रही है। क्योंकि दोनों की वेबसाईट पर ये आँकड़े उपलब्ध नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार कारखाने से निकलने वाले दूषित बहिस्राव में साईनाईड की मात्रा की माॅनिटरिंग अत्यंत आवश्यक है।
चुंकि उपायुक्त जिला पर्यावरण समिति के अध्यक्ष होते हैं, इसलिए यह आवश्यक है कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लापरवाही की गहन जाँच की जाय। तालाब में मछलियाँ मरने का कारण केवल तापक्रम के उपर-नीचे होने के आधार पर नहीं हो सकता है। तालाब के भीतर काई, तलछट, जलकुंभी तथा शैवाल की उपस्थिति कितनी है और उसमें बाहर से कोई जलस्रोत का पानी कम या अधिक मात्रा में गिर रहा है अथवा नहीं गिर रहा है, इसका भी विश्लेषण होना चाहिए। जमशेदपुर के वायुमंडल में तथा जलस्रोत में बढ़ती प्रदूषण के कारण की गहन जाँच होनी चाहिए। यह जाँच किसी थर्ड पार्टी द्वारा कराया जाना चाहिए। ताकि भविष्य में ऐसी घटना न घटित हो।
#Saryu Roy #MLA West Jamshedpur #Press Statement #Deputy Commissioner of East Singhbhum #High Level Enquiry #Mass Mortality of fishes in Dhatkidih Pond #Swarnarekha River near Babudih #Pollutants