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नियमावली नहीं, इसलिए बेलगाम है झारखंड का फार्मेसी सेक्टर : सरयू राय


25 September 2026 | Ranchi/Jamshedpur

इंडियन फार्मेसी एक्ट-1948 के आधार पर स्पष्ट नियम बनाने की सरकार को नसीहत

-चहेतों की नियुक्ति और अयोग्य कॉलेजों पर भी उठाए सवाल

-कानून बनता है, फिर छेद खोजकर होता है बेजा इस्तेमाल

-सस्ती दवाओं को बढ़ावा देने की जरूरत

-मशरूम की तरह खुल गए फार्मेसी कॉलेज

झारखंड के फार्मेसी सेक्टर की मौजूदा व्यवस्था पर जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि झारखंड में फार्मेसी को लेकर स्पष्ट नियमावली नहीं होने के कारण पूरा फार्मेसी सेक्टर बेलगाम हो गया है। 

सरकार को इंडियन फार्मेसी एक्ट, 1948 को ध्यान में रखते हुए राज्य की अपनी स्पष्ट नियमावली बनानी चाहिए और उसी के आधार पर पूरे राज्य में फार्मेसी सेक्टर का संचालन सुनिश्चित करना चाहिए।

रांची कॉलेज ऑफ फार्मेसी की ओर से विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि सरयू राय ने कहा कि जिस सरकार के नियम अस्पष्ट होते हैं, उस व्यवस्था में तेज दिमाग वाले लोग नियमों की खामियां खोजकर उसका गलत फायदा उठाते हैं। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि फार्मेसी सेक्टर जिन उद्देश्यों के लिए बनाया गया है, वे आज तक पूरी तरह हासिल नहीं हो पा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि फार्मेसी सेक्टर में चंद बड़े लोग फार्मासिस्टों को अपने हिसाब से चलाते हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव को भी कई बार कोई फैसला लेने में परेशानी महसूस होती है।
फार्मेसी सेक्टर को जनोपयोगी बनाने पर जोर देते हुए सरयू राय ने कहा कि आज के दौर में बीमारियां बढ़ी हैं। 

ऐसे में बाजार में सस्ती दवाओं का प्रचलन बढ़ाना जरूरी है। सरकार भी चिकित्सकों से सस्ती दवाएं लिखने की बात कहती है, लेकिन चिकित्सक महंगी दवाएं प्रेस्क्राइब करते हैं। उन्होंने कहा कि जरूरी है कि सस्ती दवाएं लिखी जाएं, ताकि आम आदमी उन्हें खरीद सके। ऐसा होने से ही फार्मा सेक्टर भी आगे बढ़ सकेगा।

सरयू राय ने फार्मेसी सेक्टर में योग्य लोगों को आगे लाने की जरूरत बताई। उन्होंने फार्मेसी कौंसिल में योग्य लोगों की नियुक्ति नहीं होने पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा कि जब फार्मेसी कौंसिल में रजिस्ट्रार जैसे पदों पर अपने चहेतों को नियुक्त किया जाएगा तो इस सेक्टर का भला कैसे होगा? उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया में योग्यता को कोई तरजीह नहीं दी जाती।

फार्मेसी कॉलेजों की संख्या बढ़ने पर भी सरयू राय ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि झारखंड में फार्मेसी कॉलेज मशरूम की तरह खुल गए हैं। बहुतेरे कॉलेज ऐसे हैं, जो कॉलेज होने की अर्हता नहीं रखते, फिर भी चल रहे हैं। ऐसे कॉलेजों से पढ़कर निकलने वाले बच्चे आगे क्या करेंगे? उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थानों को देखकर सवाल उठना स्वाभाविक है। 

इससे कॉलेज की बदनामी तो होगी ही, साथ ही पूरे फार्मेसी सेक्टर पर भी सवाल उठेंगे।

सरयू राय ने कहा कि फार्मा सेक्टर में अच्छे और योग्य लोगों को आना चाहिए। अच्छे लोग आएंगे तो फार्मा सेक्टर नई ऊंचाइयों को छू सकेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके लिए जरूरी है कि व्यवस्था पारदर्शी हो, योग्य लोगों को जिम्मेदारी मिले और फार्मेसी सेक्टर के संचालन के लिए स्पष्ट नियमावली हो।

उन्होंने कहा कि राज्य की फार्मेसी कौंसिल और फार्मेसी शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। तेज दिमाग वाले लोग कानूनों में कुछ छिद्र खोज लेते हैं और फिर उसका बेजा इस्तेमाल करते हैं। इससे व्यवस्था प्रभावित होती है और राज्य की बदनामी होती है।

कार्यक्रम में रांची कॉलेज ऑफ फार्मेसी के निदेशक वीरेंद्र कुमार सिंह, झारखंड उच्च न्यायालय के वरीय अधिवक्ता राजीव कुमार, झारखंड के पूर्व गृह सचिव एन.एन. पांडेय सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।

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